भारतीय फुटबॉल की नींव कैसे पड़ी
उन्नीसवीं सदी के अंत में ब्रिटिश सेना के जवान कोलकाता के मैदानों पर फुटबॉल खेलते थे। 1888 में डूरंड कप शुरू हुआ — यह एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंटों में से एक है। 1911 में मोहन बागान ने IFA शील्ड जीती, जो भारतीय खिलाड़ियों की पहली बड़ी उपलब्धि थी। 1950 के दशक में भारतीय राष्ट्रीय टीम ने ओलंपिक और एशियाई खेलों
में हिस्सा लिया। केरल, गोवा और पश्चिम बंगाल आज भी फुटबॉल के गढ़ माने जाते हैं, और 2014 में शुरू हुई ISL ने इस खेल को नई ऊर्जा दी।